करौली के डांग क्षेत्र से निकले अतुल कुमार की सफलता की कहानी प्रेरणादायक है

करौली ( मंडरायल ) , 12 जनवरी । ऐसे कई लोग होते है जो पहले बहुत परेशानी देखते है लेकिन वो कई बार असफल होने के बाद भी अपनी मेहनत मे लगे रहते है । आज ऐसी ही कहानी आपको सुनाने जा रहे है करौली जिले के मंडरायल तहसील के मध्यमवर्गीय परिवार में जन्में अतुल कुमार ने स्कूली शिक्षा मण्डरायल में हिन्दी माध्यम से सरकारी स्कूल से की , मण्डरायल में 12वीं तक पढ़ाई के बाद 2004 में वह ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी से बीएससी बायोटेक करने चले गए लेकिन ये पढ़ाई उनकी ज्यादा समझ नहीं आई । हालांकि यहां से स्नातक करने के बाद उन्होंने वर्ष 2007 में पूणे की इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैंनेजमेंट स्टेडीज से एमबीए की पढ़ाई शुरू की । ग्रामीण परिवेश से निकले अतुल कुमार को पूणे में एमबीए करने के दौरान शहरी माहौल काफी अलग तरह का दिखा । 


शहरों में अक्सर ऐसा होता ही है की जब गांव से पढने जाता है तो शहरों के युवा उसका मजाक सा बनाकर रख देते है क्योकिं वह गांव से आने वाले को गंवार समझते है और हिन्दी माध्यम का समझते है ऐसा ही अतुल कुमार के साथ हुआ । अतुल बताते हैं कि अमीर घरों से आए बच्चे उनके देहाती अंदाज और लंबाई का मजाक बनाते रहते थे कहते थे, तुम गांव लौट जाओ, तुम्हें किसी कंपनी में कौन नौकरी पर रखेगा ।

मजाक उड़ाने को माना चुनौती :- 

मजाक उड़ाने के बाद अतुल ने खूब मेहनत की पूरी मेहनत, लगन से एमबीए किया । वे एमबीए की इंटर्नशिप में टॉपर रहे । इस पर उनको एक कपंनी ने बेस्ट इंटर्न का अवॉर्ड भी दिया ।

बर्ष 2009 मे एमबीए की डिग्री हासिल की और जीवन मे कुछ नया करने की सोची । अपने दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों के साथ उन्होंने 2010 में जयपुर में न्यूरोंस एजुकेशन सर्विसेज नाम से एक कंसल्टेंसी कंपनी शुरू कर दी । ये कंपनी विशेष तौर पर एमबीबीएस कोर्स के लिए मार्गदर्शन करती है । विदेशों के कॉलेज में भी एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने में ये कंपनी प्रमुख भूमिका निभा रही है । अतुल के अनुसार वह अपनी कंपनी के माध्यम से अब तक 5 हजार से ज्यादा बच्चों की काउंसलिंग कर चुके हैं ।

अतुल बताते हैं कि इस कंपनी को शुरू करने के पीछे उनका मकसद ऐसे बच्चों को सही मार्गदर्शन देने का है, जो शिक्षा पाने के बाद सही मुकाम पाने को भटकते घूमते हैं । स्कूल-कॉलेज की शिक्षा पाने के बाद खुद को उचित मार्गदर्शन नहीं मिलने से अतुल कुमार इतने आहत हुए कि उन्होंने इसी को आधार बनाकर खुद के व्यवसाय की राह चुन ली । अतुल मलाल करते हैं कि उनको खुद को स्कूल और कॉलेज के वक्त में कोई गाइड करने वाला सलाहकार नहीं मिला था । अब वे अन्य किसी के साथ ऐसा नहीं होने देना चाहते । इसी मंशा से उन्होंने एजुकेशन सर्विसेज की कंसल्टेंसी कंपनी शुरू कर डाली ।

समाजसेवा में भी आगे :- 

अतुल चाहें इस कंपनी के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की ओर बढ़ रहे हों लेकिन वे अपने जन्म स्थल को नहीं भूले हैं । उन्होंने वर्ष 2018 से मंडरायल में अग्रवाल समाज की विधवा महिलाओं के लिए अपने दादा-दादी के नाम से 23 पंचायतों में एक पेंशन योजना चला रखी है । श्रीमती कमोदा देवी, गोपीलाल पटवारी विधवा पेंशन के नाम से पांच साल के लिए 7 विधवा महिलाओं का चयन करके उनके भरण पोषण की जिम्मेदारी वे संभाल रहे हैं ।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान करौली में राजस्थान पत्रिका की मुहिम के तहत ऑक्सीजन प्लांट लगाने के दौरान उन्होंने एक भामाशाह के रूप में सहयोग दिया । इसके अलावा समय-समय पर वृद्धाश्रम, मूक-बधिर विद्यालयों में भी सहयोग देकर सुकून की अनुभूति करते हैं ।

मत रुको, जब तक लक्ष्य न मिले :-

अतुल कुमार का मानना है कि संसाधनों को ऐसे लोगों तक पहुंचाओ जिनकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है । इसके लिए स्वामी विवेकानंद का एक कथन हमेशा प्रेरणा देता है। उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए ।

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